नील गगन पर बैठकब तक चाँद सितारों से झांकोगे
पर्वत की ऊँची चोटी से
पर्वत की ऊँची चोटी से
कब तक दुनिया को देखोगे
आदर्शों के बन्द ग्रन्थों में
आदर्शों के बन्द ग्रन्थों में
कब तक आराम करोगे
मेरा छप्पर टपक रहा है
मेरा छप्पर टपक रहा है
बनकर सूरज इसे सुखाओ
खाली है आटे का कनस्तर
खाली है आटे का कनस्तर
बनकर गेहूँ इसमें आओ
माँ का चश्मा टूट गया है
बनकर शीशा इसे बनाओ
चुप-चुप हैं आँगन में बच्चे
बनकर गेंद इन्हें बहलाओ
शाम हुई है चाँद उगाओ पेड़ हिलाओ हवा चलाओ
काम बहुत हैं
हाथ बटाओ अल्ला मियाँ
मेरे घर भी आ ही जाओ अल्ला मियाँ !!!!
निदा फाजली कृत रचना, संकलन "खोया हुआ सा कुछ" (साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मानित कृति, वाणी प्रकाशन से प्रकाशित) से।